घोटाले का मुख्य केंद्र और गड़बड़ी का पूरा मामला लखनऊ नगर निगम के विभिन्न जोनों से जुड़ा है। विभाग के कर्मचारियों ने बड़े-बड़े कमर्शियल भवनों, आलीशान मकानों और जमीनों का वास्तविक गृहकर छुपाया। करीब 1,07,000 भवनों का टैक्स सिर्फ ₹500 सालाना या उससे भी कम तय कर दिया गया, जबकि नियमानुसार इन संपत्तियों का टैक्स हजारों या लाखों में होना चाहिए था। जब इस भारी वित्तीय हेरफेर की जांच शुरू की गई, तो जोनों से रसीद पुस्तिकाएं और मुख्य फाइलें ही गायब कर दी गईं। जोन-5 से महत्वपूर्ण रसीद बुक (जैसे रसीद संख्या 7499) गायब मिली, जिससे नामांतरण और टैक्स वसूली का खेल दबाया जा सके।
कैसे होता था भ्रष्टाचार
बड़ी व्यावसायिक संपत्तियों और होटलों को कागजों पर छोटा या आवासीय दिखाकर उनका गृहकर बेहद कम तय किया गया। संपत्तियों के नाम परिवर्तन (नामांतरण) के एवज में उपभोक्ताओं से मोटी रकम वसूली गई, लेकिन उसे सरकारी खजाने में जमा करने के बजाय अधिकारियों और आउटसोर्सिंग कर्मियों ने आपस में बांट लिया। कुछ मामलों में उपभोक्ताओं को टैक्स भुगतान की फर्जी रसीदें थमा दी गईं और मूल सरकारी रिकॉर्ड में उस पैसे की एंट्री ही नहीं की गई।
शासन की सख्ती और विभागीय कार्रवाई
मामला उजागर होने के बाद शासन और नगर निगम प्रशासन ने इसे बेहद गंभीरता से लिया हैI सभी जोन प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संदिग्ध फाइलों और रसीद पुस्तिकाओं की गहराई से जांच करें। गायब फाइलों और रसीदों के मामले में संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटरों, राजस्व निरीक्षकों और जोनल अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी काम कर रही है। इस राजस्व घाटे की भरपाई के लिए अब नगर निगम बड़े बकायेदारों और गलत तरीके से टैक्स छिपाने वालों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कुर्की और सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर रहा है। इस गृहकर और नामांतरण (म्यूटेशन) घोटाले की आंच नगर निगम के कई प्रमुख जोनों और वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। प्रशासन ने इस पूरे नेक्सस को तोड़ने के लिए सीधे तौर पर जोनों और अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार खींची हैI इस बड़े घोटाले में नगर निगम के मुख्य रूप से तीन जोन सबसे ज्यादा जांच के घेरे में हैं, जहां सबसे अधिक फाइलों में हेरफेर पाया गयाI आशियाना/आलमबाग क्षेत्र - जोन 5 इस पूरे घोटाले का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। यहां से महत्वपूर्ण रसीद बुक (जैसे रसीद संख्या 7499) और मुख्य फाइलें गायब मिली हैं। इस जोन की सभी फाइलों की स्क्रूटनी सबसे पहले शुरू की गई है।
किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों पर हो रही है सीधे कार्रवाई?
नगर आयुक्त और शासन के निर्देश पर इस मामले में शामिल छोटे से लेकर बड़े स्तर के अधिकारियों पर विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है I प्राथमिक तौर पर दो राजस्व निरीक्षकों को चिन्हित कर सीधे तौर पर लपेटे में लिया गया है। इनमें से एक को गड़बड़ी के ठोस सबूत मिलने पर तत्काल निलंबित कर दिया गया है, जबकि दूसरे निरीक्षक को कारण बताओ (Show-Cause) नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच का दायरा सीधे संबंधित जोनों के जोनल अधिकारियों और जोनल टैक्स अधीक्षकों तक पहुंच गया है। शासन ने साफ किया है कि फाइलों के रख-रखाव और गायब होने की अंतिम जिम्मेदारी इन बड़े अधिकारियों की थी, इसलिए इनकी शिथिलता और संलिप्तता की गहन जांच अपर नगर आयुक्त की अध्यक्षता वाली हाई-पावर कमेटी कर रही है।
कंप्यूटर ऑपरेटर और आउटसोर्सिंग कर्मी
डिजिटल डेटा (सॉफ्टवेयर में टैक्स कम फीड करना या रिकॉर्ड डिलीट करना) में हेरफेर करने के आरोप में तीन कंप्यूटर ऑपरेटरों और आउटसोर्सिंग के जरिए तैनात कर्मचारियों को ब्लैकलिस्ट करने और उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई चल रही है। इनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की भी तैयारी है।मामला उजागर होने के बाद कई जोनों (विशेषकर जोन-5) से रसीद बुके और मूल पत्रावलियां (फाइलें) गायब पाई गईं। प्रशासन ने इसे साक्ष्यों को मिटाने की साजिश माना है। अब डिजिटल बैकअप और कंप्यूटर सर्वर लॉग्स के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि किस कंप्यूटर ऑपरेटर या अधिकारी के लॉगिन से डेटा बदला गया था।
बकायेदारों पर कुर्की और सीलिंग का चाबुक
घोटाले से नगर निगम को हुए करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए सख्त रिकवरी अभियान शुरू कर दिया गया है। इसके तहत जिन बड़े कमर्शियल और आवासीय भवनों का टैक्स गलत तरीके से कम किया गया था, उन्हें नए सिरे से नोटिस भेजे जा रहे हैं। टैक्स न चुकाने वाले बड़े डिफॉल्टर्स की संपत्तियों को सील करने और कुर्की करने की कार्रवाई तेज कर दी गई है।
