क्या है पूरा मामला और कोर्ट का रुख?
न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने आशीष कुमार मौर्य, संजय कुमार और तीन अन्य याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया है।
मूल विवाद : यह पूरा विवाद आरक्षण अधिनियम के उल्लंघन के आरोपों से जुड़ा है। याचिकाओं में मेधावी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनारक्षित वर्ग में समायोजित करने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।
कोर्ट का आदेश : हाई कोर्ट ने साफ किया है कि सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) और PCS-2025 परीक्षा का अंतिम परिणाम कोर्ट की अनुमति के बिना घोषित नहीं किया जाएगा।
आयोग से जवाब तलब : कोर्ट ने इस गंभीर मामले पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) से विस्तृत जवाब मांगा है।
· याचिकाओं में उठाए गए मुख्य बिंदु
याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं (अशोक खरे व सिद्धार्थ खरे) ने कोर्ट के सामने निम्नलिखित दलीलें रखीं:
कट-ऑफ और अंकों की मांग : याचिकाकर्ताओं ने आयोग से मुख्य परीक्षा (Mains) में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों के अंक और सभी श्रेणियों की कट-ऑफ का रिकॉर्ड तलब करने की मांग की है।
संशोधित परिणाम की मांग : दलील दी गई है कि एमआरसी (MRC) को अनारक्षित श्रेणी में शामिल कर नया और संशोधित परिणाम घोषित किया जाए। साथ ही आयोग से इसके अनुसार आगे की परीक्षा कराने का आग्रह किया गया है।
शर्तों का उल्लंघन : याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि आयोग के 9 जनवरी 2020 के कार्यालय ज्ञापनों और विज्ञापनों की शर्तों का इस प्रक्रिया में उल्लंघन किया गया है।
· आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब यूपी लोक सेवा आयोग को इस मामले में अपना पक्ष रखना होगा। इस आदेश के बाद इन प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों की धड़कनें बढ़ गई हैं। परीक्षा के अंतिम परिणाम अब पूरी तरह से इस कानूनी विवाद के निपटारे और हाई कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेंगे।
