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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से सरकार को बड़ा झटका, न्यूनतम वेतनमान और अनुमन्य भत्ते दिए जाने चाहिए

✍ Mamta Singh 📅 25 अगस्त 2026 👁 32 बार पढ़ा गया
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से सरकार को बड़ा झटका, न्यूनतम वेतनमान और अनुमन्य भत्ते दिए जाने चाहिए

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त पदों पर मानदेय के आधार पर शिक्षकों की भर्ती की नीति को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने लगभग 190 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि, स्वीकृत पदों पर नियुक्त अस्थाई शिक्षकों को भी पद का न्यूनतम वेतनमान (Minimum Pay Scale) और अनुमन्य भत्ते मिलने चाहिए।

कोर्ट ने 9 नवंबर 2023 (तदर्थ शिक्षकों को हटाने) और 8 जुलाई 2024 (कम मानदेय पर भर्ती) के शासनादेशों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब पद स्वीकृत है और काम समान है, तो टीजीटी (25k) और पीजीटी (30k) को बेहद कम मानदेय देना अनुचित है। उन्होंने सरकार की नीति को 'अपरोबेट एंड रीप्रोबेट' (एक साथ हां और ना कहना) के सिद्धांत के विपरीत बताया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक नियमित भर्ती नहीं होती, अस्थाई नियुक्तियां की जा सकती हैं, लेकिन उन्हें पद का न्यूनतम वेतनमान और भत्ते देने होंगे। इस फैसले से एडेड स्कूलों में कम मानदेय पर शिक्षकों को रखने की प्रथा पर रोक लगेगी और उन्हें सम्मानजनक वेतन मिल सकेगा। 

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