5 अक्टूबर 2026, सोमवार
ब्रेकिंग
बड़े प्रशासनिक फेरबदल के तहत 13 IAS और 25 PCS अधिकारियों के तबादले हाकी में 'सोने पर सुहागा': एशियाई खेलों में भारतीय पुरुष हॉकी टीम की ऐतिहासिक जीत, 2028 ओलंपिक के लिए क्वालीफाई I पाकिस्तान हुआ पस्त, भारत ने रचा इतिहास ! 19 रन से जीतकर जीता एशियन गेम्स गोल्ड, फ्लाईदुबई विमान को हाईजैक करने की साजिश, भारतीय पायलट पर हमला करने वाले सह-पायलट की हुई पहचान स्नातक उत्तीर्ण शीर्ष 50 हजार बेटियों को अगले महीने मिलेंगे स्कूटर : मुख्यमंत्री योगी 2027 वनडे विश्व कप का पूरा कार्यक्रम जारी -- 10 अक्टूबर को जोहान्सबर्ग में आमने-सामने होंगे भारत और पाकिस्तान
विदेश

रूस प्रतिबंध विधेयक से भारत समेत कई देशों पर 100% टैरिफ लगाएंगे ट्रंप?

✍ Mamta Singh 📅 16 सितंबर 2026 👁 64 बार पढ़ा गया
रूस प्रतिबंध विधेयक से भारत समेत कई देशों पर 100% टैरिफ लगाएंगे ट्रंप?

15 सितंबर 2026 I रूस प्रतिबंध विधेयक और अन्य कई विधानों को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव 214-211 मतों से अनुमोदित हुआ।यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार देगा। इसमें भारत और अन्य देश भी शामिल हैं, साथ ही ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों का विस्तार भी होगा। इस परिणाम से सदन के डेमोक्रेटिक नेतृत्व को झटका लगा। विधेयक पर बुधवार को सदन में अंतिम मतदान होने की उम्मीद है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के रैंकिंग सदस्य डेमोक्रेटिक कांग्रेसी ग्रेगरी

अमेरिकी संसद में आगे बढ़ रहे इस विधेयक का नाम 'लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026' है। अमेरिकी सीनेट से पहले ही पारित हो चुके इस विधेयक को को अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी प्रक्रियात्मक मंजूरी मिल गई है।

विधेयक का मुख्य उद्देश्य

युद्ध की फंडिंग रोकना : अमेरिका का मानना है कि रूस अपने कच्चे तेल और गैस व्यापार से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को वित्तपोषित करने में कर रहा है। इस कमाई को पूरी तरह से ठप करना ही इस बिल का मूल उद्देश्य है।

शैडो फ्लीट को तबाह करना : रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए पुराने और बिना पश्चिमी बीमा वाले जहाजों (जन्हें 'शैडो फ्लीट' कहा जाता है) के जरिए तेल की सप्लाई की जाती है। यह बिल इन जहाजों को प्रतिबंधित करने और तेल के अवैध ट्रांसफर को रोकने के लिए कड़े नियम लागू करता है।

दबाव बढ़ाना : इसके तहत रूस के शीर्ष नेतृत्व (राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और सैन्य कमांडर), वित्तीय संस्थानों (जैसे रूस का सेंट्रल बैंक), और प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं पर सीधे कड़े प्रतिबंध लगाने का लक्ष्य है।

अब आगे क्या होगा?

यह बिल वैश्विक राजनीति और वैश्विक तेल बाजार में बड़ा बदलाव ला सकता है:

भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ का खतरा: इस विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को यह अधिकार मिल जाएगा कि वे रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष देशों पर 100% तक का भारी आयात शुल्क लगा सकें। भारत और चीन इसके सबसे बड़े खरीदार हैं, इसलिए अमेरिकी संसद में लाए गए ताजा संशोधनों में विशेष रूप से भारत और चीन का नाम शामिल करने की मांग की गई है।

संसद में अंतिम वोटिंग और कानून बनना : हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में प्रक्रियात्मक बाधा पार होने के बाद अब इस पर अंतिम वोटिंग होनी है। सदन से पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह पूर्ण रूप से कानून बन जाएगा।

वैश्विक बाजार और कूटनीतिक तनाव : यदि यह बिल पूरी तरह कानून बनता है और अमेरिका भारत जैसे रणनीतिक सहयोगियों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध या टैरिफ लगाता है, तो इससे भारत-अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में तनाव आ सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि रूस के तेल को पूरी तरह बाजार से बाहर करने पर दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें अस्थिर हो सकती हैं।

हालांकि, अमेरिकी संसद के भीतर भी इस बात को लेकर बहस चल रही है कि क्या राष्ट्रपति को इतनी बड़ी टैरिफ शक्तियां दी जानी चाहिए, और कुछ सांसद भारत जैसे देशों को इससे बाहर रखने या इस प्रावधान को हटाने के लिए संशोधन पेश कर रहे हैं।

टिप्पणियाँ (0)

सबसे पहले टिप्पणी करें।